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Wednesday, January 27, 2016

Gas Cylinder Safety Tips in Hindi

Gas Cylinder Safety, Home Safety, Gas Cylinder, Gas
अपने परिवार की सुरक्षा के लिए 2 मिनिट का समय निकाल कर इसे अवश्य पढ़े...!!!

L.P.G.गैस सिलेण्डर की भी "एक्सपायरी डेट" होती है।
एक्सपायरी डेट निकलने के बाद गैस सिलेण्डर को इस्तेमाल करना बम की तरह खरतनाक हो सकता है। आमतौर पर गैस सिलेण्डर की रिफील लेते समय उपभोक्ताओं का ध्यान इसके वजन और सील पर ही होता है।

उन्हें सिलेण्डर की एक्सपायरी डेट की जानकारी ही नहीं होती।
इसी का फायदा एलपीजी की आपूर्ति करने वाली कंपनियां उठाती हैं और धड़ल्ले से एक्पायरी डेट वाले सिलेण्डर रिफील कर हमारे घरों तक पहुंचाती हैं। यहीं कारण है कि गैस सिलेण्डरों से हादसे होते हैं।

कैसे पता करें एक्सपायरी डेट
सिलेण्डर के उपरी भाग पर उसे पकड़ने के लिए गोल रिंग होती है और इसके नीचे तीन पट्टियों में से एक पर काले रंग से सिलेण्डर की एक्सपायरी डेट अंकित होती है। इसके तहत अंग्रेजी में A, B, C तथा D अक्षर अंकित होते है तथा साथ में दो अंक लिखे होते हैं।

  1. A अक्षर साल की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च),
  2. B साल की दूसरी तिमाही (अप्रेल से जून),
  3. C साल की तीसरी तिमाही (जुलाई से सितम्बर)
  4. D साल की चौथी तिमाही अर्थात अक्टूबर से दिसंबर को दर्शाते हैं।

इसके बाद लिखे हुए दो अंक एक्सपायरी वर्ष को संकेत करते हैं।
यानि यदि सिलेण्डर पर A 11 लिखा हुआ हो तो सिलेण्डर की एक्सपायरी मार्च 2011 है। इस सिलेण्डर का "मार्च 2011" के बाद उपयोग करना खतरनाक होता है।

इस प्रकार के सिलेण्डर बम की तरह कभी भी फट सकते हैं।
ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे इस प्रकार के एक्सपायर सिलेण्डरों को लेने से मना कर दें तथा आपूर्तिकर्त्ता एजेंसी को इस बारे में सूचित करें !

(एक्शन फॉर सोशल एन्ड ह्यूमन एडवांसमेंट द्वारा जनहित में जारी)
Note : कृप्या घरेलू सुरक्षा के मद्देनजर इस पोस्ट को अधिक-अधिक शेयर करे !!
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Tuesday, October 29, 2013

जेनेटिक-मॉडिफाइड फसल हमारे देश में बेचने की पूरी साजिश


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क्या पूरी दुनिया में सिर्फ भारत के लोग ही मिले है एक्सपेरिमेंट करने के लिए लिए?? मित्रो, आज एक ऐसा मुद्दा उठा रहा हूँ जो भारत की जनता के स्वस्थ्य को तै करेगा |

जेनेटिक-मॉडिफाइड फसल हमारे देश में बेचने की पूरी साजिश रची जा चुकी है और MNC लॉबी यह कहकर देश की जनता को गुमराह कर रही है की इसके कोई भी नुक्सान नहीं है |

अगर इस फसल का कोई भी नुक्सान नहीं है तोह क्यूँ Europe में GM(Genetic Modify) खाद्य पदार्थ बंद है ? क्यूँ अमेरिका में बंद है ?

जेनेटिक मॉडिफाइड वो फल सब्जी या अनाज होता है जिका DNA बदल दिया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा फसल हो सके |

DNA वो पदार्थ होता है जो इंसान को इंसान बनता है और पशु को पशु . पशुओ और इंसानों में मुश्किल से 5% DNA का फर्क होता है |

आज हमें नहीं पता की DNA बदले जाने पर अनाज किस प्रकार का उगा है और लम्बे समय तक उसका मानव जाती पर क्या प्रभाव पड़ेगा | इसिलए यह सभी विदेशी लोग अपने लालच के चक्कर में सारा अनाज भारत को बेचने में लगे है और भारत की चोर लुटेरी कांग्रेस सरकार भी इनका साथ दे रही है |

अगर भारत में ऐसा ही चलता रहा तोह भविष्य में वो वक्त भी भारत देख सकता है जब पूरा देश बीमारियों से ग्रसित होगा और इलाज मिलने से पहले पूरे देश की जनता बिमारी के कारण सब कुछ खो दे अपने प्राण भी |

DNA के साथ खेलना प्रकृति का काम है इंसानों का नहीं | अगर इंसान प्रकृति के काम में ऊँगली करेगा तोह इसके परिणाम बहुत भयानक होंगे, इतने भयानक की इंसान कल्पना भी नहीं कर सकता
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Wednesday, October 31, 2012

डेंगू का उपचार

 डेंगू का उपचार 
आजकल डेंगू एक बड़ी समस्या के तौर पर उभरा है, जिससे कई लोगों की जान जा रही है l

यह एक ऐसा वायरल रोग है जिसका मेडिकल चिकित्सा पद्धति में कोई इलाज नहीं है परन्तु आयुर्वेद में इसका इलाज है और वो इतना सरल और सस्ता है की उसे कोई भी कर सकता है l तीव्र ज्वर, सर में तेज़ दर्द, आँखों के पीछे दर्द होना, उल्टियाँ लगना, त्वचा का सुखना तथा खून के प्लेटलेट की मात्रा का तेज़ी से कम होना डेंगू के कुछ लक्षण हैं जिनका यदि समय रहते इलाज न किया जाए तो रोगी की मृत्यु भी सकती है l

यदि आपके किसी भी जानकार को यह रोग हुआ हो और खून में प्लेटलेट की संख्या कम होती जा रही हो तो चित्र में दिखाई गयी चार चीज़ें रोगी को दें :
१) अनार जूस
२) गेहूं घास रस
३) पपीते के पत्तों का रस
४) गिलोय/अमृता/अमरबेल सत्व

- अनार जूस तथा गेहूं घास रस नया खून बनाने तथा रोगी की रोग से लड़ने की शक्ति प्रदान करने के लिए है, अनार जूस आसानी से उपलब्ध है यदि गेहूं घास रस ना मिले तो रोगी को सेब का रस भी दिया जा सकता है l
 
- पपीते के पत्तों का रस सबसे महत्वपूर्ण है, पपीते का पेड़ आसानी से मिल जाता है उसकी ताज़ी पत्तियों का रस निकाल कर मरीज़ को दिन में २ से ३ बार दें , एक दिन की खुराक के बाद ही प्लेटलेट की संक्या बढ़ने लगेगी l
 
- गिलोय की बेल का सत्व मरीज़ को दिन में २-३ बार दें, इससे खून में प्लेटलेट की संख्या बढती है, रोग से लड़ने की शक्ति बढती है तथा कई रोगों का नाश होता है l यदि गिलोय की बेल आपको ना मिले तो किसी भी नजदीकी पतंजली चिकित्सालय में जाकर "गिलोय घनवटी" ले आयें जिसकी एक एक गोली रोगी को दिन में 3 बार दें l

यदि बुखार १ दिन से ज्यादा रहे तो खून की जांच अवश्य करवा लें l
यदि रोगी बार बार उलटी करे तो सेब के रस में थोडा नीम्बू मिला कर रोगी को दें, उल्टियाँ बंद हो जाएंगी l
ये रोगी को अंग्रेजी दवाइयां दी जा रही है तब भी यह चीज़ें रोगी की बिना किसी डर के दी जा सकती हैं l
डेंगू जितना जल्दी पकड़ में आये उतना जल्दी उपचार आसान हो जाता है और रोग जल्दी ख़त्म होता है l
रोगी के खान पान का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि बिना खान पान कोई दवाई असर नहीं करती l
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Friday, October 19, 2012

Benefits of Rudraksha


रुद्राक्ष की शक्तियों को पहचाने..

एक से चौदह मुखी तक रुद्राक्ष लोगों में लोकप्रिय है किस धारणा से कोन सा रुद्राक्ष व्यक्ति को धारण करना चाहिए और रुद्राक्षधारी को किन भोज्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए. इसका ज्ञान होना परम आवश्यक है.

रुद्राक्ष धारण करने के लिए शुभ समय ग्रहण,मेष संक्रांति, अयन, अमावस, पूर्णिमा और अन्य शुभ दिन शास्त्रों में लिखित है.रुद्राक्ष की माला में दानों की संख्या १०८ दानों की माला बल और आरोग्यता प्रदान करती है.१०८ दानों की माला समस्त कार्यों में सिद्धि देने वाली होती है. ३२ दानों की माला धन दायिनी होती है.

जप के लिए प्रयोग लाए जानी वाली माला १०८ दानों की होती है. ५४ दानों की माला आधी और २७ दानों की माला को सुमरनी कहते है.फल सभी का एक जैसा होता है.५४ दानों की माला दो बार और २७ दानों की माला चार बार पूरी कर लेने पर एक माला सम्पूर्ण होती है.तीन सौ आठ रुद्राक्षों की लड़ी बना कर यज्ञोपवीत धारण किया जाता है. शिखा में एक,कानों में छह-छह, कंठ में एक सौ या पचास,बांहों में ग्यारह, मणिबंध में ग्यारह, कमर में पांच रुद्राक्ष धारण करने का विधान है. हाईब्लडप्रेशर (उच्च रक्तचाप) के मरीजों के लिए रुद्राक्ष धारण करना वरदान के समान होता है.रुद्राक्ष रक्तचाप को नियंत्रित रखता है.इसके लिए जरूरी है कि रुद्राक्ष की माला रोगी के हृदय को छूती हुई होनी चाहिए.यह रोगी के शरीर की गर्मी को स्वयं में खींच कर उसे बाहर फेंकता है.

एक मुखी रुद्राक्ष :- एक मुखी रुद्राक्ष परातत्व का प्रकाशक है.परम तत्व की प्राप्ति की धारणा से इसको धारण करना चाहिए.सहज ही ईश्वर प्राप्ति की शक्ति इस रुद्राक्ष में पायी जाति है.

दो मुखी रुद्राक्ष :- दो मुखी रुद्राक्ष अर्धनारीश्वर होता है.इसे धारण करने वाले पर अर्धनारीश्वर भगवान शिव प्रसन्न रहते है.इस रुद्राक्ष में भगवान शिव-पार्वती दोनों की शक्ति रहती है.

तीन मुखी रुद्राक्ष :- तीन मुखी रुद्राक्ष तीन अग्नियों के रूप वाला है.इसको धारण करने से अग्नि की तृप्ति होती है स्त्री हत्या के पाप से मुक्ति दिलाने की शक्ति तीन मुखी रुद्राक्ष में होती है.

चार मुखी रुद्राक्ष :- चार मुखी रुद्राक्ष ब्रह्मा की शक्ति से ओतप्रोत होता है.इसको धारण करने वाला उत्तम स्वास्थ्य को प्राप्त करता है. उसे कभी कोई रोग नही होता है.इसे महा ज्ञान,बुद्धि और धन के लिए भी धारण किया जाता है.

पांच मुखी रुद्राक्ष :- पांच मुखी रुद्राक्ष पंचब्रह्म स्वरूप होता है. इसको धारण करने से भगवान शिव तथा हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है. तथा मन एकाग्र होने लगता है.

छह मुखी रुद्राक्ष :- छह मुखी रुद्राक्ष के देवता कार्तिकेय जी है. विद्वानों ने गणेश जी को भी छह मुखी रुद्राक्ष का देवता माना है.इसे धारण करने से दोनों देवता प्रसन्न होते है तथा विद्या में लाभ होता है.छह मुखी रुद्राक्ष को बांये हाथ में धारण करने से अज्ञात पापों का नाश होता है.

सात मुखी रुद्राक्ष :- सात मुखी रुद्राक्ष की देवियाँ सात माताये है.सूर्य औए सप्तऋषि इसके देवता है. इसको धारण करने वाले पर श्री महालक्ष्मी प्रसन्न रहती है.इसको धारण करने से परम ज्ञान और धन की भी प्राप्ति होती है. सोने की चोरी आदि के पाप से मुक्ति दिलाने की शक्ति सात मुखी रुद्राक्ष में होती है.
 
आठ मुखी रुराक्ष :- आठ मुखी रुद्राक्ष आठ माताये देवता है इसको धारण करने से आठों वसु और गंगा प्रसन्न रहती है इसको पहनने वालो पर सत्यवादी सब देवता प्रसन्न रहते है. इसे धारण करने से अनेक प्रकार के पाप नष्ट होते है.

नौ मुखी रुद्राक्ष :- नौ मुखी रुद्राक्ष के देवता भैरव और यमराज जी है.नौ मुखी रुद्राक्ष धारण करने वालो को कभी भी यमराज का भय नही रहता है.इसको बाँयी भुजा में धारण करने से शाक्ति प्राप्त होती है.भ्रूणहत्या हत्या के पाप से भी नौ मुखी रुद्राक्ष मुक्ति दिलाता है.

दस मुखी रुद्राक्ष :- दस मुखी रुद्राक्ष के स्वामी दशों दिशाए है.भगवान विष्णु भी इसके देवता है. दस मुखी रुद्राक्ष धारण करने से दशों दिशाओं में यक्ष रक्षा करता है. भूत-पिशाच, बेताल, ब्रह्मराक्षस आदि दस मुखी रुद्राक्ष से शांत हो जाते है.इसको धारण करने से सभी ग्रह भी शांत रहते है.

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष :- ग्यारह मुखी रुद्राक्ष के देवता ग्यारह रूद्र है.इन्द्र भी इसके स्वामी है.जो कुछ भी दान करने की इच्छा रही हो और आपने दान नही किया हो तो ग्यारह मुखी रुद्राक्ष शिखा में धारण करने से दान की पूर्ति हो जाति है.क्योंकि हजारों गोदान का जो पुण्यफल है वह इसको धारण करने वाले को मिलता है.

बारह मुखी रुद्राक्ष :- बारह मुखी रुद्राक्ष के देवता श्री महाविष्णु जी है. बारहों आदित्य भी इसके देवता है.इसको धारण करने से किसी भी तरह का भय नही सताता है. व्यक्ति रोग-व्याधि से मुक्त हो कर राजा बनने के योग्य हो जाता है. शासन करने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को बारह मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करने चाहिए.इससे उसे सफलता मिलती है.

तेरह मुखी रुद्राक्ष :- तेरह मुखी रुद्राक्ष के देवता कामदेव है.इसको धारण करने से काम और रस रसायन में वृद्धि होती है.सब प्रकार के भोग प्राप्त होते है.जीव हत्या के पाप का भी शमन होता है
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चौदह मुखी रुद्राक्ष :- चौदह मुखी रुद्राक्ष रूद्र के नेत्र से प्रकट हुआ है. चौदह मुखी रुद्राक्ष यदि प्राप्त हो जाए तो इसे सिर पर धारण करना चाहिए.इसके प्रभाव से बहुत मान सम्मान मिलता है.चौदह मुखी रुद्राक्ष के अनगिनत गुण है.इसको धारण करने वाला साक्षात् शिव स्वरुप होता है.

रुद्राक्ष धारण करने वाले को शराब, प्याज, सहिजना लहसोड़ा और मांस आदि नही खाना चाहिए....
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Saturday, July 28, 2012

क्या आप नशा छोडना चाहते है?



क्या आप नशा छोडना चाहते है? या किसी को एस के बारे में सलाह देना चाहते है तो ये अवश्य पढ़े..

मित्रो बहुत से लोग नशा छोडना चाहते है पर उनसे छुटता नहीं है ! बार बार वो कहते है हमे मालूम है ये गुटका खाना अच्छा नहीं है लेकिन तलब उठ जाती है तो क्या करे ???
 

बार बार लगता है ये बीड़ी सिगरेट पीना अच्छा नहीं है लेकिन तलब उठ जाती है तो क्या करे !??
बार बार महसूस होता है यह शाराब पीना अच्छा नहीं है लेकिन तलब हो जाती है तो क्या करे ! ????

तो आपको बीड़ी सिगरेट की तलब न आए गुटका खाने के तलब न लगे ! शारब पीने की तलब न लगे ! इसके लिए बहुत अच्छे दो उपाय है जो आप बहुत आसानी से कर सकते है ! पहला ये की जिनको बार बार तलब लगती है जो अपनी तलब पर कंट्रोल नहीं कर पाते नियंत्रण नहीं कर पाते इसका मतलब उनका मन कमजोर है ! तो पहले मन को मजबूत बनाओ!

मन को मजबूत बनाने का सबसे आसान उपाय है पहले थोड़ी देर आराम से बैठ जाओ ! आलती पालती मर कर बैठ जाओ ! जिसको सुख आसन कहते हैं ! और फिर अपनी आखे बंद कर लो फिर अपनी दायनी(right side) नाक बंद कर लो और खाली बायी(left side) नाक से सांस भरो और छोड़ो ! फिर सांस भरो और छोड़ो फिर सांस भरो और छोड़ो !

बायीं नाक मे चंद्र नाड़ी होती है और दाई नाक मे सूर्य नाड़ी ! चंद्र नाड़ी जितनी सक्रिये (active) होगी उतना इंसान का मन मजबूत होता है ! और इससे संकल्प शक्ति बढ़ती है ! चंद्र नाड़ी जीतने सक्रिये होती जाएगी आपकी मन की शक्ति उतनी ही मजबूत होती जाएगी ! और आप इतने संकल्पवान हो जाएंगे ! और जो बात ठान लेंगे उसको बहुत आसानी से कर लेगें ! तो पहले रोज सुबह 5 मिनट तक नाक की right side को दबा कर left side से सांस भरे और छोड़ो ! ये एक तरीका है ! और बहुत आसन है !

दूसरा एक तरीका है आपके घर मे एक आयुर्वेदिक ओषधि है जिसको आप सब अच्छे से जानते है और पहचानते हैं ! उस ओषधि का नाम है अदरक ! और आसानी से सबके घर मे होती है ! इस अदरक के टुकड़े कर लो छोटे छोटे उस मे नींबू निचोड़ दो थोड़ा सा काला नमक मिला लो और इसको धूप मे सूखा लो ! सुखाने के बाद जब इसका पूरा पानी खतम हो जाए तो इन अदरक के टुकड़ो को अपनी जेब मे रख लो ! जब भी दिल करे गुटका खाना है तंबाकू खाना है बीड़ी सिगरेट पीनी है ! तो आप एक अदरक का टुकड़ा निकालो मुंह मे रखो और चूसना शुरू कर दो ! और यह अदरक ऐसे अदबुद चीज है आप इसे दाँत से काटो मत और सवेरे से शाम तक मुंह मे रखो तो शाम तक आपके मुंह मे सुरक्षित रहता है ! इसको चूसते रहो आपको गुटका खाने की तलब ही नहीं उठेगी ! तंबाकू सिगरेट लेने की इच्छा ही नहीं होगी शराब पीने का मन ही नहीं करेगा ! बहुत आसन है कोई मुश्किल काम नहीं है !

जैसे ही इसका रस लाड़ मे घुलना शुरू हो जाएगा आप देखना इसका चमत्कारी असर होगा आपको फिर गुटका –तंबाकू शराब –बीड़ी सिगरेट आदि की इच्छा ही नहीं होगी ! सुबह से शाम तक चूसते रहो ! और 10 -15 -20 दिन लगातार कर लिया ! तो हमेशा के लिए नशा आपका छूट जाएगा !

आप बोलेगे ये अदरक मैं ऐसे क्या चीज है !????

यह अदरक मे एक ऐसे चीज है जिसे हम रसायनशास्त्र (क्मिस्ट्री) मे कहते है सल्फर !
अदरक मे सल्फर बहुत अधिक मात्रा मे है ! और जब हम अदरक को चूसते है जो हमारी लार के साथ मिल कर अंदर जाने लगता है ! तो ये सल्फर जब खून मे मिलने लगता है ! तो यह अंदर ऐसे हारमोनस को सक्रिय कर देता है ! जो हमारे नशा करने की इच्छा को खत्म कर देता है !

और विज्ञान की जो रिसर्च है सारी दुनिया मे वो यह मानती है की कोई आदमी नशा तब करता है ! जब उसके शरीर मे सल्फर की कमी होती है ! तो उसको बार बार तलब लगती है बीड़ी सिगरेट तंबाकू आदि की ! तो सल्फर की मात्रा आप पूरी कर दो बाहर से ये तलब खत्म हो जाएगी ! इसका राजीव भाई ने हजारो लोगो पर परीक्षण किया और बहुत ही सुखद प्रणाम सामने आए है ! बिना किसी खर्चे के शराब छूट जाती है बीड़ी सिगरेट शराब गुटका आदि छूट जाता है ! तो आप इसका प्रयोग करे !

और इसका दूसरे उपयोग का तरीका पढे !

अदरक के रूप मे सल्फर भगवान ने बहुत अधिक मात्रा मे दिया है ! और सस्ता है! इसी सल्फर को आप होमिओपेथी की दुकान से भी प्राप्त कर सकते हैं ! आप कोई भी होमिओपेथी की दुकान मे चले जाओ और विक्रेता को बोलो मुझे सल्फर नाम की दावा देदो ! वो देदेगा आपको शीशी मे भरी हुई दावा देदेगा ! और सल्फर नाम की दावा होमिओपेथी मे पानी के रूप मे आती है प्रवाही के रूप मे आती है जिसको हम Dilution कहते है अँग्रेजी मे !

तो यह पानी जैसे आएगी देखने मे ऐसे ही लगेगा जैसे यह पानी है ! 5 मिली लीटर दवा की शीशी 5 रूपये आती है ! और उस दवा का एक बूंद जीभ पर दाल लो सवेरे सवेरे खाली पेट ! फिर अगले दिन और एक बूंद डाल लो ! 3 खुराक लेते ही 50 से 60 % लोग की दारू छूट जाती है ! और जो ज्यादा पियाकड़ है !जिनकी सुबह दारू से शुरू होती है और शाम दारू पर खतम होती है ! वो लोग हफ्ते मे दो दो बार लेते रहे तो एक दो महीने तक करे बड़े बड़े पियकरों की दारू छूट जाएगी !

तो ये सल्फर अदरक मे भी है ! होमिओपेथी की दुकान मे भी उपलब्ध है ! आप आसानी से खरीद सकते है !लेकिन जब आप होमिओपेथी की दुकान पर खरीदने जाओगे तो वो आपको पुछेगा कितनी ताकत की दवा दूँ ??!
 

 मतलब कितनी Potency की दवा दूँ ! तो आप उसको कहे 200 potency की दवा देदो ! आप सल्फर 200 कह कर भी मांग सकते है ! लेकिन जो बहुत ही पियकर है उनके लिए आप 1000 Potency की दवा ले !आप 200 मिली लीटर का बोतल खरीद लो एक 150 से रुपए मे मिलेगी ! आप उससे 10000 लोगो की शराब छुड़वा सकते हैं ! मात्र एक बोतल से ! लेकिन साथ मे आप मन को मजबूत बनाने के लिए रोज सुबह बायीं नाक से सांस ले ! और अपनी इच्छा शक्ति मजबूत करे !!!

अब एक खास बात !

बहुत ज्यादा चाय और काफी पीने वालों के शरीर मे arsenic तत्व की कमी होती है !
उसके लिए आप arsenic 200 का प्रयोग करे !

गुटका,तंबाकू,सिगरेट,बीड़ी पीने वालों के शरीर मे phosphorus तत्व की कमी होती है !
उसके लिए आप phosphorus 200 का प्रयोग करे !

और शराब पीने वाले मे सबसे ज्यादा sulphur तत्व की कमी होती है !
उसके लिए आप sulphur 200 का प्रयोग करे !!

सबसे पहले शुरुवात आप अदरक से ही करे !!

वन्देमातरम !
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Tuesday, May 29, 2012

कागज बचाओ, पर्यावरण बचाओ



कागज : एक राष्ट्रीय सम्पत्ति

सन २००४ के आम चुनाव भारत के लिये बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए हैं, राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से, क्योंकि विश्व के इन सबसे बडे चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (Electronic Voting Machines) का देशव्यापी उपयोग किया गया, जिसके कारण लाखों टन कागज की बचत हुई । जाहिर है लाखों टन कागज की बचत अर्थात लाखों पेड़ कटने से बच गये, पर्यावरण (Environment) की नजर से यह एक असाधारण उपलब्धि मानी जा सकती है । हम सभी जानते हैं कि कागज बनाने का सीधा सम्बन्ध वनों की कटाई से होता है, और कागज का दुरुपयोग, मतलब हमारे और खराब होते हुए पर्यावरण को एक और धक्का ।

हमारे दैनिक जीवन में, रोजमर्रा के कामकाज में, ऑफ़िसों (Offices) में, कॉलेजों (Colleges), न्यायालयों (Courts), तात्पर्य यह कि लगभग सभी क्षेत्रों में कागज का सतत उपयोग होता रहता है, होता रहेगा, क्योंकि वह जरूरी भी है । लेकिन यहाँ बात हो रही है कागज के बेरहम दुरुपयोग की । क्या कभी किसी ने इस ओर ध्यान दिया है कि हम कागज का कितना दुरुपयोग करते हैं ? कई बार तो ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ लोगों को कागज मुफ़्त में मिल रहा है, या भारत में कागज की अधिकता हो गई है । कुछ उदाहरणों से इस विकराल समस्या को समझने और उसका निराकरण करने में सहायता मिलेगी ।

सबसे पहले बात न्यायालयों की, न्यायालयों में परम्परा के तौर पर "लीगल" कागज का उपयोग होता है । इस कागज का नाम "लीगल" पडा़ ही इसीलिये कि यह न्यायिक प्रक्रिया में उपयोग होने वाला कागज है । अनजान लोगों के लिये यह बताना जरूरी है कि "लीगल" कागज, एक सामान्य "ए४" कागज से थोड़ा सा लम्बा (दो सेमी अधिक) होता है । प्रायः देखा गया है कि लम्बी-लम्बी कानूनी प्रक्रिया के दौरान, हजारों, लाखों रुपये के कागज लग जाते हैं, जो कि गवाही, सबूत, शपथपत्र आदि तमाम न्यायिक गतिविधि को देखते हुए सामान्य और स्वाभाविक है, परन्तु क्या ऐसा नहीं किया जा सकता कि कोर्ट का सारा काम "लीगल" पेपर के बजाय, "ए४" कागज पर हो, जबकि ऐसा बगैर किसी परेशानी के किया जा सकता है ।

कल्पना ही की जा सकती है कि लाखों-करोड़ों कागज यदि दो-दो से.मी. कम हो जायेंगे तो कितने टन कागज की बचत होगी । कोई भी माननीय न्यायाधीश अपनी ओर से पहल करके अपने वकीलों से कह सकता है कि मेरे द्वारा सुनवाई किये जाने वाले कागज "लीगल" नहीं बल्कि "ए४" होंगे, तो अपने-आप धीरे-धीरे सभी लोग इसे अपना लेंगे, और कागज की लम्बाई कम हो जाने से कानून पर कोई फ़र्क नहीं पडे़गा, कानून तो अपना काम आगे भी करता रहेगा । तमाम स्टाम्प पेपर, ग्रीन पेपर, शपथ-पत्र, करारनामे आदि "लीगल" पेपर पर ही क्यों, और कोढ़ मे खाज यह कि अधिकतर कागज (रजिस्ट्री वगैरह छोड़कर) पीछे तरफ़ से कोरे होते हैं, अर्थात उस कीमती कागज की एक बाजू तो बेकार ही छोड़ दी जाती है । ऐसा क्यों ?

क्या कागज के दोनों तरफ़ टाईप करने या फ़ोटोकॉपी करने से कानूनी दलील कमजोर हो जायेगी ? या किसी धारा का उल्लंघन हो जायेगा ? फ़िर यह राष्ट्रीय अपव्यय क्यों ? उच्चतम न्यायालय इस बात की व्यवस्था कर सकते हैं कि जो भी न्यायालयीन कागज एक तरफ़ से कोरा हो उस पर अगला पृष्ठ लगातार टाईप किया जाये, जरा सोचिये हमारी अदालतों मे लाखों केस लम्बित हैं उनमें कितना कागज बेकार गया होगा और इस विधि से भविष्य में हम कितना कागज बचा सकते हैं ।

ठीक इसी प्रकार का मामला अकादमिक क्षेत्रों में कागज के दुरुपयोग का है । भारत के तमाम विश्वविद्यालयों, संस्थानों, शोध प्रतिष्ठानों, महविद्यालयों आदि में पीएच.डी., एम.फ़िल., एम.एससी., लघु शोध प्रबन्ध आदि ऐसे हजारों अकादमिक कार्य चलते रहते हैं जिसमें छात्र को अपनी रिपोर्ट या थेसिस या संक्षेपिका जमा करानी होती है वह भी एक नहीं चार-पाँच बल्कि सात-सात प्रतियों में (वह शोध कितना उपयोगी होता है, यह बहस का एक अलग विषय है)... मेरा सुझाव है कि सभी रिपोर्टों और थेसिस (Reports and Thesis) को कागज के दोनों ओर टाईप किया जाये, जाहिर है कि उनकी फ़ोटोकॉपी भी वैसी ही की जायेगी । अमूमन एक पीएच.डी. थेसिस कम से कम दो सौ पृष्ठों की तो होती ही है, उसकी सात प्रतियाँ अर्थात चौदह सौ कागज, यदि यही थेसिस दोनों ओर टाईप की जाये तो हम सीधे-सीधे सात सौ कागज एक थेसिस पर बचा लेते हैं.

कल्पना करें कि देश भर में चल रहे सभी थेसिस एवं रिपोर्टों को कागज के दोनो ओर टाईप करने से कितना कागज बचेगा (मतलब कितने पेड़ बचेंगे) । थेसिस को एक ही तरफ़ प्रिन्ट करने की शाही और अंग्रेजी प्रथा / परम्परा को तत्काल बन्द किया जाना चाहिये, क्योंकि अन्ततः मतलब तो उस थेसिस के निष्कर्षों से है, यदि शोध कार्य उत्कृष्ट है तो फ़िर इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि वह कागज के एक ओर है या दोनों ओर । साथ ही यदि शोध कार्य घटिया है तो वह कितने भी चिकने और उम्दा कागज पर प्रिन्ट किया गया हो, घटिया ही रहेगा । सभी बडे़ विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव मिलबैठ कर तय कर लें कि सभी थेसिस एवं रिपोर्ट कागज के दोनों ओर टाईप की जायेंगी और स्वीकार की जायेंगी । उनका यह कार्य राष्ट्रीय कर्तव्य के रूप में याद किया जायेगा ।

देश में भयानक बेरोजगारी है, यह एक स्थापित तथ्य है, नौकरी के एक-एक पद के लिये सैकड़ों आवेदन दिये जाते हैं, जो कि समस्या को देखते हुए स्वाभाविक भी है, परन्तु कागज के अपव्यय का यह भी एक विडम्बनापूर्ण उदाहरण है, - एक समाचार पत्र में किसी पद का विज्ञापन प्रकाशित होता है, युवक अपनी सारी डिग्रियों की फ़ोटोकॉपी प्रत्येक आवेदन के साथ लगाते हैं (हाईस्कूल से लेकर पीएच.डी. और नेट/स्लेट तक की) ऐसा वह प्रत्येक आवेदन के साथ करता है, अर्थात कागज के अनावश्यक दुरुपयोग के साथ ही बेरोजगार पर फ़ोटोकॉपी के ढेर का आर्थिक बोझ भी । मेरा सुझाव है कि सरकारें (केन्द्र और राज्य) प्रत्येक जिले, तहसील, गाँव में सक्षम प्राधिकारी को अधिकृत करें, जो कि बेरोजगारों के सभी मूल प्रमाणपत्रों को एक बार देखकर, उनकी जाँच करके एक "कार्ड" जारी करें, जिसमें उस युवक की तमाम उपाधियों का उल्लेख हो, जिस प्रकार परिवहन विभाग सारे कागज जाँच कर "यलो कार्ड" जारी करता है, उसी तर्ज पर ।

युवक आवेदन पत्र के साथ सिर्फ़ वह कार्ड या उसकी छायाप्रति लगाये, जब उसका चयन इंटरव्यू के लिये हो जाये तभी वह नियोक्ता के समक्ष अपने मूल प्रमाणपत्रों के साथ हाजिर हो जाये । आवेदक वैसे भी अपनी सभी शैक्षणिक गतिविधियों का उल्लेख अपने बायो-डाटा में तो करता ही है, फ़िर सभी की फ़ोटोकॉपी लगाने की क्या आवश्यकता है ? क्योंकि एक पद के लिये चार-पाँच सौ आवेदन आना तो मामूली बात है, उनमें से चार-पाँच उम्मीदवार जो कि इंटरव्यू के लिये चुने जाने हैं, के अलावा बाकी के सारे कागज तो रद्दी की टोकरी में ही जाने हैं, यह कागज का भीषण अपव्यय तो है ही, बेरोजगारों के साथ अमानवीयता भी है ।

कम्प्यूटरीकरण के पश्चात अलबत्ता कागजों के उपयोग में कमी आई है, लेकिन उसे उल्लेखनीय नहीं कहा जा सकता, क्योंकि बैंकों में भी कम्प्यूटरीकरण के बावजूद सभी रिकॉर्ड के प्रिन्ट आऊट कागजों पर भी लेने की परम्परा (सुरक्षा की दृष्टि से) जारी है, फ़िर क्या विशेष फ़ायदा हुआ ? रोज शाम को दिन भर के "ट्रांजेक्शन" का प्रिन्ट आऊट लो, उसे सम्भालकर रखो, उसका बैक-अप कैसेट भी बनाओ फ़िर और सुरक्षा के लिये उसकी एक कॉपी भी रखो... यह सब क्या है ? क्या तकनीक बढने से कागज के उपभोग में कमी आई है ? जर्मनी में बडे़ से बड़ा अफ़सर भी कागज की छोटी-छोटी पर्चियों पर अपना सन्देश लिखकर देते हैं । हमारे यहाँ चार पंक्ति की मामूली सी "नोटशीट" के लिये पूरा का पूरा "ए४" कागजक्यों लिया जाये ? लेकिन क्या सरकारी कर्मचारी (दामाद) और क्या प्राईवेट सभी जगह क्लर्क हों या अफ़सर "माले-मुफ़्त दिल-ए-बेरहम" की तर्ज पर कागज का दुरुपयोग करते फ़िरते हैं, क्या यह राष्ट्रीय अपराध की श्रेणी में नहीं आता ?

इसीलिये अब समय आ गया है कि हम कागज को भी "राष्ट्रीय सम्पत्ति" घोषित कर दें, और उसके सही इस्तेमाल हेतु एक जनजागरण अभियान चलाया जाये । लोगों को शिक्षित किया जाये कि किस तरह से कम से कम कागज में अपना काम निकाला जाये, इसके लिये सरकार के साथ सामाजिक संगठनों, प्रिन्ट मीडिया और महत्वपूर्ण व्यक्तियों को आगे आकर उदाहरण पेश करना होगा ।

आप आपके घर में पड़े हुवे वेस्ट कागज, बुक और न्यूज पेपर आदि को कचरे में न डाले, उस को आप किशी वेस्ट पेपर लेनेवाले की दुकान पर दे दीजिए, जिशसे आपके वेस्ट पेपर का भी उपयोग हो जायेगा और आपको कुछ पैशे भी मिलेंगे
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क्या आप फ़्रिज का इतिहास जानते है?



दोस्तो आपके घर में फ़्रिज होगा ।

लेकिन क्या आप फ़्रिज का इतिहास जानते है? ?
कि कैसे ये युरोप के देशो से भारत में आया और क्यों आया ? ? ? ?

कुछ वर्ष पहले KELVINATOR नाम की फ़्रिज बनाने वाली कंपनी भारत में आई ।
क्यों आई ? ?

क्या उसके मन में दया आ गई कि भारत के लोगो को ठंडा पानी पिलाना है ।

नहीं कारण कुछ और था । वो कारण ये था कि KELVINATOR की marketing खत्म हो गयी पुरे युरोप और अमेरिका में |

क्यों खत्म हो गई ? ? ?

क्यों कि अमेरिका और युरोप के देशो में एक समस्या शुरु हो गई (कलोरो फ़लोरो कार्बन के एमिशन की ) (C.F.C) |

ये समस्या रेफ़ारिजरेटर के कारण हुई । क्योंके कि इससे C.F.C बहुत निकलता है ।
C.F.C से होता क्या है कि हमारे वातावरण एक़ अजोन परत होती है जो हमको सूर्य से निकलने वाली अॅल्ट्रा वालेट रेन से बचाती है ।ये अगर आपकी चमड़ी पर सीधी पर जाये तो आपकी चमड़ी जल जायेगी ।

तो हुआ ये कि कि रेफ़्रिजरेटर की जितनी तकनीकी दुनिया में विकसित हुई । उस से c.f.c की समस्या बढ़ गई और इतनी बढ़ गई कि युरोप के कुछ देश के आसमान में अजोन खत्म होने से एक बहुत भारी होल हो गया । जिससे वहां गर्मी बढ़ने लगी और गलेशियर पिघलने लगे । नदियओ में पानी ज्यादा होने लगा और वहां बाढ़ आ गई ।

1996 में अमेरिका के लासएंजलेस में बाढ़ आई । इतना बढ़ा अमेरिका का मैनेमेंट सिस्टम था लेकिन कुछ नहीं कर पाया । बाद पता लगा कि बाढ़ क्यों आई कि अमेरिका में गर्मी बढ़ गई और गलेशियर पिघले और नदियों पानी ज्यादा हुआ और बाढ़ आई ।

कारण पाता कि C.F.C एमिइशन बढ़ने से वातावरण में गर्मी बढ़ी ।
तो इन सारे देशो में एक भयंकर किस्म की घबराह्ट होने लगी ।
तो इन 12 ,13 देशो में नय एक समझोता किया कि धीरे धीरे इस c.f.c एमिइशन को technology ख्त्म कर देगें 2000 तक आते आते पुरा खत्म कर देगें ।

तो किसी ने सवाल किया कि c.f.c बनाने वाली टैकनोलोजी का क्या होगा । तो किसी ने कहा कि भारत में लाकर डंप कर देगें ।

फ़िर इसको लेकर वो भारत में घुस आये ।
अब डंप करने वाली वस्तु बिकेगी कैसे ? ? ?

तो इसके लिये उनहोने हैवी विज्ञापन किये कि आपका घर कुछ भी नहीं है अगर आपके घर में फ़्रिज नहीं है । आपका घर रद्दी है अगर आपके घर मे फ़्रिज नहीं है ।

अब रोज रोज टी वी आप यही बात सुनेगे तो एक दिन उठा कर घर ले ही आयेगें ।

हिंदुस्तान के मूर्ख लोगो ने एक मिनट नहीं सोचा कि इस फ़्रिज की हमको क्या जरुर है । अब ले आये है तो किया किया पहले रोज अच्छी भली ताजी सब्ज़ी खाते थे । अब सब्ज़िया ला ला कर उसको फ़्रिज में भर देते है ।

युरोप के देश सुखे है और वहां कुछ परंपरा भी ऐसी है कि रोज खाना नहीं बनाते । और सब्ज़िया भी रोज वहां मिलती नहीं है जो जाती है वो भारत से जाती है तो हफ़ते में एक दिन सब्ज़िया ख़रीद लाते उनको फ़्रिज में भर देते है वो पुरा हफ़ता खाते है ।

लेकिन हमारे भारत में तो हर दिन ताजी सब्ज़ी मिलती हैं और सुबह को अलग मिलती है दोपहर, शाम को अलग मिलती है । और भारत में हमारी मां हमे रोज गर्म गर्म रोटी बना कर देती है युरोप में किसी की मां नहीं देती ।

तो उनको जरुरत थी तो उनहोने अपने लिये फ़्रिज बनाया और और हम बिना वजह उठा इसे घर ले आये ।

अब एक और मूर्खता करते है पलास्टिक की बोतल मे फ़्रिज में ठंडा पानी रख देगें ।

आप जानते है पुरी दुनिया में पलास्टिक सबसे घटिया वस्तु है कुछ खाने और पीने के लिये!
जपान और कई अन्य देशो खाने पीने की चीज़े पलस्टिक पैकिंग़ मे बेचने पर बैन लगा दिया है । ।

युरोप के देशो के लोगो को एक आदत है कोई भी चीज़ पीयें तो आधे से ज्यादा उनमे बर्फ़ डालेगें और एक दम ठंडी करके पीयेंगे ।

नतीजा ये है अमेरिका मे हर दुसरा आदमी कबजियत का शिकर हैं । पिछले एक सर्वे के अनुसार 90% अमेरिका के लोगो को कबजियत की परेशानी है घंटो घंटो टायलेट मे बैठे रहते हैं लेकिन टायलेट नहीं आती । वहां डाकटरो का कहना है कि उनके देश में कबजियत का सबसे बढ़ा कारण लोगो का ठंडा पानी पीना हैं अगर इससे बचन है तो ताजा पानी पियो ।

हमारे भारत में हजारो साल से शास्त्र यही सिखाते है कि ताजा पानी पियो ।

तो होता ये है टैकनोलोजी आपकी जरुरत की नहीं होती उसे जानबुझ कर आपकी जरुरत बनाया जाता है और आपके देश में डंप कर दिया जाता है ।
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